Skip to main content

भारत के 700 सैनिक सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग कर रहे हैं

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने 'अशांत क्षेत्रों' में सेना को मिले विशेषाधिकारों में कथित कटौती के ख़िलाफ़ सैकड़ों फ़ौजियों के सुप्रीम कोर्ट जाने पर नाराज़गी जताई है.
सेना के क़रीब 700 जवानों और अधिकारियों ने हाल में सुप्रीम कोर्ट से गुज़ारिश की है कि चरमपंथ-प्रभावित क्षेत्रों में सेना को मिले ख़ास अधिकारों (आफ़्सपा) में किसी तरह की कोई कटौती या बदलाव न किया जाए क्योंकि इसका फ़ौज के कामकाज और उसकी मन:स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
सुप्रीम कोर्ट इस समय भारत के पूर्वोतर राज्य मणिपुर में सेना, अर्ध-सैनिक बलों और स्थानीय पुलिस के हाथों हुई कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामलों की सुनवाई कर रही है जिसमें कोर्ट के हुक्म पर सीबीआई का एक विशेष दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है और उन मामलों में से एक में कर्नल विजय सिंह बलहारा के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने चंद दिनों पहले अपनी एक रिपोर्ट में कहा था, ''आफ़्स्पा के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाने वाले  सैनिकों (जिसमें जवान औऱ अधिकारी भी शामिल हैं) में वो भी हैं जो उस कर्नल विजय सिंह बलहारा के मातहत काम करते हैं जिनके ख़िलाफ़ मणिपुर में 12-साल के एक बच्चे के कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ केस में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
सैनिकों के अदालत में जाने पर जनरल रावत की नाराज़गी की ख़बर मंगलवार को सामने आई है, लेकिन फ़ौजियों के इस क़दम को सेना के कई पूर्व आला अधिकारियों ने सामूहिक तौर पर संगठन बनाने जैसा माना है और कहा है कि ये फ़ौज के क़ानून के ख़िलाफ़ है.र्व मेजर जनरल अशोक मेहता कहते हैं कि 'मातहतों को इस काम के लिए उकसाया गया है.'
सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग ने अपने एक लेख में आला अधिकारियों की मौन स्वीकृति तक की बात कही है.
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग इसे सरकार की नाकामी का नतीजा मानते हैं जो सैनिकों की शिकायतों का निपटारा रक्षा मंत्रालय के स्तर पर नहीं कर पाई - जहां वो सेना मुख्यालय के माध्यम से होती हुई आनी चाहिए थी.
कर्नल विजय सिंह बलहारा के ख़िलाफ़ कथित मुठभेड़ का मामला साल 2009 का है. तब बलहारा मेजर हुआ करते थे और उनपर एक 12-साल के मुस्लिम बच्चे के फ़र्ज़ी मुठभेड़ का आरोप है.
सुप्रीम कोर्ट में सेना, अर्ध-सैनिक बलों और स्थानीय पुलिस ने मुठभेड़ों के ख़िलाफ़ अगस्त 2012 में मानवधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एलर्ट और फ़र्ज़ी मुठभेड़ के पीड़ितों के परिवार के संगठन ने याचिका दाख़िल की.
मुठभेड़ के ये मामले मणिपुर में 1979 से 2012 के बीच के थे जिनमें से 1528 मामलों को ह्यूमन राइट्स एलर्ट ने रिकॉर्ड किया था और उसने ये रिकॉर्ड अदालत के सामने रखा.
अदालत में इसकी पहली सुनवाई अक्टूबर 2012 में हुई जिसमें अदालत का मानना था कि जो मामले उसके सामने रखे गए हैं उनकी सत्यता की जांच की जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जस्टिस संतोष हेगड़े जांच कमीशन का गठन हुआ जिसने कुल 1528 में से मुठभेड़ की छह घटनाओं की जांच की. कमीशन को ये जांच करना था कि क्या ये मुठभेड़ सही थे और दूसरे, जिनके साथ मुठभेड़ किया गया उनकी पृष्ठभूमि क्या थी.दालत में जांच कमेटी की रिपोर्ट पर अप्रैल 2013 में चर्चा की गई. अदालत ने जुलाई 2016 में फ़ैसला दिया कि जिन इलाक़ों में विशेषाधिकार क़ानून लागू भी है वहां भी अगर इस तरह की कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच होनी चाहिए.
लेकिन बहुत सारे मामलों में परिवार बाद में मुक़दमा चलाने को राज़ी नहीं हुए और फ़िलहाल 100 के आसपास केसों की जांच सीबीआई की एसआईटी कर रही है.
मामले में अभी तक 41 एफआईआर दर्ज हो चुके हैं. छह मामलों में चार्जशीट दाख़िल की गई है.
ह्यूमन राइट्स अलर्ट के बबलू लोइटोंगबांग ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि इन मामलों को मानवधिकार समूह ने 1990 के दशक के अंत में रिकॉर्ड करना शुरू किया जब सुप्रीम कोर्ट ने आफ़्स्पा की वैधता को सही ठहराया था.
आफ़्स्पा के भीतर अशांत क्षेत्रों में सेना को बहुत व्यापक अधिकार हासिल होते हैं और इसके तहत वो बिना वारंट के गिरफ़्तारी, तलाशी और शूट-टू-किल जैसे क़दम उठा सकती है और उसके ख़िलाफ़ किसी तरह का कोई केस नहीं किया जा सकता है.
इस क़ानून को साल 1958 में सबसे पहले नगालैंड में लगाया गया था और अब ये पूर्वोतर के कई राज्यों (असम, नगालैंड, मणिपुर और अरुणाचल के कुछ हिस्सों) में लागू है. इसे अदालत में चैलेंज भी किया जा चुका है.
सरकार का मानना है कि सशस्त्र विद्रोह और पृथकतावादी आंदोलनों जैसी स्थिति से निपटने के लिए सेना को इन विशेषाधिकारों की ज़रूरत है. लेकिन मानवाधिकार समूहों का दावा है कि अक्सर इन विशेषाधिकारों का नाजायज़ इस्तेमाल होता है.

Comments

Popular posts from this blog

احتجاجات هونغ كونغ: اشتباكات بين الأمن والمتظاهرين

أطلق ضابط شرطة في هونغ كونغ رصاصة من مسدسه على المحتجين، الأحد ، في أول استخدام للطلقات الحية ضد التظاهرات التي اندلعت منذ يونيو/حزيران الماضي. وأظهرت صور الاحتجاجات العديد من ضباط الشرطة يوجهون البنادق نحو المتظاهرين، وأطلقوا الرصاص المطاطي وقنابل الغاز لوقف المتظاهرين الذين كانوا يطاردونهم بالعصي. وأبلغت الشرطة وسائل الإعلام المحلية أن إطلاق الرصاصة جاء لتحذير المتظاهرين، وأن العديد من الضباط نُقلوا إلى المستشفى بعد الإصابة جراء الاشتباكات. وفي سابقة هي الأولى منذ الاحتجاجات، نشر ت الشرطة مدافع المياه لاستخدامها ضد المتظاهرين في وقت سابق من اليوم . وامتدت الاحتجاجات إلى منطقة تسيم شا تسوي، بعد ان كانت قد بدأت في منطقة تسوين وان. وجاءت المظاهرات احتجاجا على مشروع قانون تقدمت به الحكومة لتسليم المجرمين إلى الخارج (وخاصة الصين)، وتحولت بعد ذلك إلى احتجاجات أوسع نطاقا ض د الحكومة، لكن تطورات يوم الأحد تمثل تصعيدا خطيرا في الاضطرابات . وكانت منظمة العفو الدولية لحقوق الإنسان، قد حذرت في وقت سابق هذا الشهر، من خطورة استخدام مدافع المياه والتي يمكن أن تسبب إ صابات خطيرة وت...

مصر.. براءة 40 متهما في قضية التمويل الأجنبي

قضت محكمة جنايات القاهرة ببراءة 40 متهما في القضية المعروفة إعلاميا بـ"التمويل الأجنبي"، خلال إعادة محاكمتهم . وصدر الحكم حضوريا لصالح 38 متهما، وغيابيا لصالح متهمين اثنين، كما قبلت المحكمة تظلم متهم آخر على قرار منعه من السفر. إقرأ المزيد مصر.. محاكمات في قضية "التمويل الأجنبي" وكانت محكمة جنايات القاهرة أصدرت في يونيو 2013 أحكا ما بالإدانة تراوحت ما بين السجن 5 سنوات غيابيا بحق 27 متهما، ومعاقبة 5 متهمين بالحبس لمدة عامين مع الأشغال الشاقة، ومعاقبة 11 متهما بالحبس لمدة سنة واحدة مع وقف التنفيذ، والقضاء بحل فروع منظمات المعهد الجمهوري وا لمعهد الديمقراطي ومنظمة فريدوم هاوس وال مركز الدولي الأمريكي للصحفيين ومؤسسة كونراد الألمانية، وإغلاق مقارهم بمصر ومصادرة الأموال والأمتعة المضبو طة وجميع الأوراق والأدوات المضبوطة في مقار هذه المنظمات. لكن محكمة النقض المصرية قضت بإلغاء ا لأحكام الصادرة في هذا القرار، وإ عادة محاكمة المتهمين....

उप्र के रफी और प्रतिष्ठा ने टूर्नामेंट का पहला गोल्ड जीता

खेल डेस्क. खेलो इंडिया यूथ गेम्स का दूसरा  संस्करण बुधवार से महा राष्ट्र के पुणे में शुरू हो रहा है। 11 दिन तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में 18 खेलों में 9 हजार से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। इनके अलावा लगभग 4 हजार टीम स्टाफ और अधिका री यहां मौजूद रहेंगे। मे जबान महाराष्ट्र से कुल 900 खिलाड़ियों का दल शामिल हुआ है। हालांकि, इसके आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही कुछ खेलों के मु काबले शुरू हो गए। जिम्नास्ट मोहम्मद रफी और प्रतिष्ठा सामंता इस संस्करण में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए । जिम्नास्टिक में उत्तर प्रदेश के दो खिलाड़ियों ने पदक जीते अंडर-17 मेंस कैटेगरी में उत्तर प्रदेश के मोहम्मद रफी ने आर्टि स्टिक जिम्नास्टिक में 68.25 स्कोर के साथ गोल्ड जीता। उत्तर प्रदे श के ही राज यादव ने 67.50 स्कोर के साथ सिल्वर और दिल्ली के तुषार कल्याण ने 66.90 स्कोर के साथ ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया। पहले संस्करण में भी पदक जीत चुके हैं तुषार तुषार ने पिछले खेलो इंडिया गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं, वुमन्स कैटेगरी में बंगाल की प्रतिष्ठा 42.05...